इंसानी दिमाग से कंट्रोल किया चूहा, भूकंप के बाद बचाव में इस्तेमाल किया जा सकेगा

SaveSavedRemoved 0
Deal Score0
Deal Score0

गैजेट डेस्क. चीनी वैज्ञानिकों ने इंसानी दिमाग से चूहे के दिमाग को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित की है। इसके लिए उन्होंने एक वायरलेस ब्रेन-टू-ब्रेन सिस्टम बनाया है जिससे इंसान को एक ‘साइबॉर्ग चूहे (मशीन लगे चूहे)’ के दिमाग को नियंत्रित किया जा सकता है। यह तकनीक भूकंप के बाद ढहे मकानों और इमारतों के बीच जाकर बचाव कार्य में मदद कर सकता है।

यह शोध ‘रेट साइबॉर्गप्रिपरेशन’ पेपर में प्रकाशित किया गया है। इसमें ब्रेन-टू-ब्रेन इंटरफेस (बीबीआई) के बारे में बताया गया है, जिसके जरिए किसी इंसानी दिमाग को कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है। इसी सिस्टम का इस्तेमाल बाद में चूहे के दिमाग को कंट्रोल करने में किया गया।

सिग्नल से कंट्रोल किए चूहे

वैज्ञानिकों ने चूहे के शरीर में हरकत पैदा करने के लिए उनकी पीठ पर इलेक्ट्रोड लगाए। ये इलेक्ट्रोड वायरलेस तरीके से चूहे के मस्तिष्क से जुड़े थे। पहले प्रयोग में चूहे को एक मेज पर चलाया गया जो भूल-भुलैया की तरह थी। दूसरी तरफ एक इंसान को बैठाया गया था, जिसमें इलेक्ट्रो एन्फैलोग्राम (ईईजी) लगाए गए थे, जिनकी मदद से वह चूहे को नियंत्रित कर रहा था। ईईजी कम्प्यूटर से जुड़ा था। ये कम्प्यूटर पहले इंसानी दिमाग से निकलने वाले सिग्नल को डिकोड करता था फिर उन्हें चूहे के दिमाग में भेजा जाता था। इस सिग्नल के जरिए ही इंसान चूहे को बता रहा था कि उसे आगेकब और कहां जाना है?

छह चूहों को सीधे रास्तों में चलाने में सफलता

रिसर्चरों ने बताया, चूहे को दाएं और बाएं मोड़ने के लिए इंसानी दिमाग के सिग्नल का इस्तेमाल किया गया लेकिन, चूहे को आगे की तरफ बढ़ाने के लिए पलकें झपकानी पड़ीं। हालांकि, इस तरह चूहे को सिर्फ तीन मिनट ही घुमाया जा सका। इस तकनीक के जरिए चूहों को भूल-भुलैया की बजाय सीधे रास्तों से गुजारना ज्यादा आसान है। लगातार 10 टेस्ट में, छह चूहों को सीधे रास्तों में चलाने में 90% तक सफलता हासिल हुई।

चूहे पर कैमरा और वॉकी-टॉकी लगाने की सलाह
इस तकनीक से चूहों को भूकंप से नष्ट हुई इमारत के अंदर भेजा जा सकता है, जिसे बाहर से बैठकर इंसान अपने दिमाग से कंट्रोल करेगा। शोधकर्ता एंगस मैकमोर्लैंड का कहना है, “इस तकनीक की मदद से चूहे पर छोटा वॉकी-टॉकी लगाकर और छोटा कैमरा लगाकर ढही इमारत के अंदर इंसानों को खोजने के लिए भेज सकते हैं।”

2013 मेंपहली बार पूंछ को नियंत्रित किया था

ये कोई पहली बार नहीं है जब ब्रेन-टू-ब्रेन इंटरफेस (बीबीआई) सिस्टम पर काम किया गया है। इससे पहले 2013 में, बीबीआई के जरिए इंसानी दिमाग को चूहे के साथ जोड़ा गया था, जिससे इंसानी दिमाग के जरिए चूहे की पूंछ को नियंत्रित किया गया था। वहीं 2016 में, इंसानी दिमाग को साइबोर्ग कॉकरोच से जोड़ा गया था।


प्रतीकात्मक चित्र।

Register New Account
Reset Password
Compare items
  • Total (0)
Compare